📅 प्रकाशित दिनांक: 5 Jul 2025
✍️ लेखक: SarkariYojna.digital Team
🗂️ श्रेणी: उद्योग और व्यापार, केंद्र सरकार की योजनाएं
🎯 परिचय
भारत का खिलौना उद्योग, जो एक समय पूरी तरह से आयात पर निर्भर था, अब घरेलू निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और 153 देशों को निर्यात कर रहा है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने यह जानकारी 16वें ‘टॉय बिज़ इंटरनेशनल B2B एक्सपो 2025’ के उद्घाटन सत्र में दी।
🧩 नई योजना की घोषणा
मंत्री ने बताया कि भारत सरकार जल्द ही खिलौना क्षेत्र के लिए एक नई प्रोत्साहन योजना शुरू करने जा रही है। इस योजना का उद्देश्य भारतीय खिलौना उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है।
योजना के मुख्य फोकस क्षेत्र होंगे:
- डिज़ाइन क्षमताओं में सुधार
- गुणवत्ता आधारित निर्माण
- बेहतर ब्रांडिंग और पैकेजिंग
- निर्यात को प्रोत्साहन

🧠 बदलाव का आधार: नीति और गुणवत्ता
पीयूष गोयल ने कहा कि यह बदलाव संभव हुआ है सरकार द्वारा:
- नीति आधारित सहयोग
- गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) के सख्त कार्यान्वयन
- स्थानीय निर्माण क्लस्टर्स के सशक्तिकरण से
उन्होंने बताया कि QCO ने भारत को एक गुणवत्ता-सचेत देश बनाने में मदद की है और घरेलू निर्माता अब अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतर रहे हैं।
🏠 1.4 अरब की जनसंख्या – एक विशाल बाज़ार
मंत्री ने कहा कि भारत की 1.4 अरब आबादी एक स्थायी और विशाल घरेलू बाज़ार उपलब्ध कराती है, जो उत्पादकों को:
- उत्पादन में स्केल बढ़ाने,
- लागत में कमी लाने, और
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त दिलाने में मदद करता है।
📦 ब्रांडिंग, पैकेजिंग और डिज़ाइन का महत्व
उन्होंने खिलौना निर्माताओं से आग्रह किया कि अगर वे बेहतर ब्रांडिंग, आकर्षक पैकेजिंग और इनोवेटिव डिज़ाइन पर ध्यान दें, तो भारतीय खिलौने वैश्विक बाजार में बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं।
🚀 ‘वोकल फॉर लोकल’ से ‘ग्लोबल’ की ओर
मंत्री ने बताया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’ का आह्वान किया था, तब कई लोगों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन आज ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत यह साबित हो गया है कि स्थानीय उद्योग भी वैश्विक पहचान बना सकते हैं।
💰 स्टार्टअप्स और मुद्रा योजना का समर्थन
गोयल ने यह भी बताया कि नवाचार पर काम कर रहे टॉय स्टार्टअप्स को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत बिना गारंटी लोन मिल रहे हैं, जिससे इस क्षेत्र में छोटे व्यवसायों को मजबूती मिली है। यह योजना अब 20 वर्षों तक के लिए विस्तारित की गई है।
🧩 18 खिलौना क्लस्टर्स को मिला MSME समर्थन
उन्होंने बताया कि देशभर में 18 खिलौना क्लस्टर्स को MSME मंत्रालय द्वारा वित्तीय और तकनीकी सहायता दी जा रही है ताकि स्थानीय निर्माण को प्रोत्साहन मिल सके।
✅ निष्कर्ष
खिलौना उद्योग की यह उन्नति भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम है। सरकार का यह नया प्रोत्साहन कदम भारतीय खिलौनों को वैश्विक मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास साबित होगा।
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